उपचार विधियाँ

वैरिकोज वेंस के उपचार की कई विधियाँ हैं। हालत की गंभीरता को देखते हुए किसी विशिष्ट उपचार या कुछ उपचारों को मिलाकर करने की सलाह दी जाती है। कुछ उपचार विकल्पों में निम्नलिखित शामिल हैं:

एंडोवेनस लेज़र

कुछ मामलों में अन्तर्निहित नसों की बीमारी का इलाज एक उन्नत अल्ट्रासाउंड द्वारा निर्देशित लेज़र तकनीक के माध्यम से एक इंच के एक चौथाई भाग से भी कम आकार का एक छोटा सा छेद करके या चीरा लगाकर किया जाता है। कभी कभी इसे एंडोवेनस लेज़र या एन्डोलेज़र कहा जाता है, इस तरीके से ऐसी नस की बीमारी का उपचार किया जाता है जिसे पहले बड़े चीरे की मदद से किया जाता था। अल्ट्रासाउंड निर्देशित नसों के उपचार में हमारे कई वर्षों के अनुभव, हमें विशिष्ट रूप से योग्य बनाते हैं ताकि हम अपने मरीज़ों को इस विकसित अल्ट्रासाउंड निर्देशित नसों के उपचार का सुझाव दे सकें। यह प्रक्रिया, ऑफिस में भी पूरा किया जा सकता है। ज़्यादा जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें!!

रूढ़िवादी उपचार

जब किसी मरीज़ में वैरिकोज वेंस के हल्के लक्षण दिखाई देते हैं तो उनको आराम पहुँचाने के लिए उपचार के रूप में मौखिक दवा और विशेष दबाव वाले मोज़े काफी होते हैं। लेकिन आपको ये ज़रूर पता होना चाहिए कि यह बढ़ने वाली स्थिति है, और इसीलिए दवाइयों और विशेष मोज़े के बावजूद बीमारी के लक्षण गंभीर हो जाते हैं। इसलिए अपने चिकित्सक के साथ नियमित जाँच करवाना अनिवार्य है।

a) दवाइयाँ

विभिन्न दवाइयों की वकालत की जाती है जिनका अलग-अलग असर होता है। हॉर्स चेस्टनट पेड़ की छाल एक बहुत साधारण उपचार है जो काउंटर पर भी उपलब्ध है। यह मकड़ी नसों की जलन को कम करने में कारगर माना जाता है और एड़ियों में हुए सूजन को भी कम करता है।

एमपीएफएफ (मैक्रोनाइज़्ड प्यूरीफाइड फ्लेवेनोइड फ्रैक्शन) जो डाफ्लॉन के नाम से उपलब्ध है बड़े पैमाने पर अध्ययन की गई दवाई है। काफी सारे अनियमित परीक्षणों में यह देखा गया है कि थकान और पैरों के दर्द, एड़ियों के सूजन और वैरिकोज वेंस की प्राथमिक चिकित्सा में यह सहायक होता है। लेकिन इसके लिए एक डॉक्टर के पर्चे की ज़रुरत होती है जो आपको ये दवा लिखे जिससे आपको फायदा हो सकता है।

b) विभाजित दबाव वाले मोज़े:

मोज़े, वैरिकोज वेंस के शुरूआती उपचार का आधार है। वह सिर्फ पैरों में दर्द और ऐंठन से ही सिर्फ आराम नहीं देता है बल्कि वैरिकोज वेंस के बढ़ते हुए लक्षणों को भी कम करता है। 

c) नियमित व्यायाम:

नियमित घूमना या दौड़ना पिंडलियों के पंप को सक्रीय करता है और नसों से रक्त के खाली होने और हृदय तक पहुँचने में मदद करता है।
1. दर्द और पीड़ा को कम करता है
2. अल्सर का बनना कम करता है
3. सतही फ्लेबिटीज़ एंड डीवीटी के समाधान को तेज़ करता है
4. रोज़ 30 मिनट सबसे अच्छा है
5. चरम सीमा को कम करने से मदद मिलती है (भारी वज़न उठाने और श्रमसाध्य गतिविधि से दूर रहें)

स्क्लेरोथेरपी

इस तकनीक में कम मात्रा में दवाई, सीधा वैरिकोज वेंस में सुई द्वारा दी जाती है। स्क्लेरोसेंट दवाई की अम्लीय प्रकृति, अंदर के नस के वाल्व पर असर डालती है जिससे नस में ऐंठन होती है और बाद में नस बंद हो जाता है। जिस नस का इलाज करना है उसके व्यास को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग अनुपात में स्क्लेरोसेंट दवाई का इस्तेमाल किया जाता है। इसे या तो द्रव के रूप में सुई द्वारा अन्दर डाला जाता है या हवा या कार्बन डाइऑक्साइड की मदद से झाग बनाकर। इसे बारीक सुइयों द्वारा नस में डाला जाता है सीधे देखकर या गहरी नसों के मामले में अल्ट्रासाउंड के दिशा निर्देश में। 
साधारणतया इस्तेमाल की जाने वाली दवाई, सोडियम टेट्राडेसिल सल्फेट या पॉलिडोकानोल हैं।

फोम स्क्लेरोथेरपी

स्क्लेरोसिंग एजेंट को द्रव रूप में इस्तेमाल करने के बदले, इस तकनीक में झाग वाला स्क्लेरोसिंग घोल इस्तेमाल होता है। स्क्लेरोसिंग एजेंट को द्रव रूप में इस्तेमाल करने के बदले, इस तकनीक में झाग वाले स्क्लेरोसिंग चिकित्सा के पीछे वही सिद्धांत है जो हजामत बनाने वाले क्रीम को इतना असरदार बनाता है। झाग वाला स्क्लेरोथेरपी, नस को परेशान करता है और उसे द्रव स्क्लेरोथेरपी से ज़्यादा जल्दी सिकुड़ने के लिए मजबूर करता है।

सर्जिकल लिगेशन और स्ट्रिपिंग

सर्जिकल स्ट्रिपिंग सबसे गंभीर वैरिकोज वेंस के मामले जो 10% हैं उनके लिए आरक्षित है। ये प्रायः प्रमुख सतही नस (लम्बी सफेनस नस) को हटाने के काम आता है जो पेट और जांघ के बीच के भाग से लेकर एड़ियों तक दौड़ता है। ये सिर्फ त्वचा से रक्त इकठ्ठा करता है। नसों को हटाने से पैरों में रक्त के प्रवाह पर कोई असर नहीं होगा क्योंकि पैरों में जो गहरी नसें हैं वे रक्त की बड़ी मात्रा का ध्यान रखते हैं। वेन स्ट्रिपिंग वैरिकोज वेंस के उपचार का सबसे पुराना तरीका है। पहली सर्जरी 100 साल पहले हुई थी। चीरा, पैरों में नसों का पता लगाने और उसके टुकड़े करने के लिए किया जाता है। विभिन्न बनावट वाले लम्बे ‘‘स्ट्रिपर्स’’ इन नसों द्वारा डाले जाते हैं और फिर नस और स्ट्रिपर्स दोनों को एक साथ पैरों में से खींचा जाता है। ऊतक क्षति शामिल होने के कारण इसे साधारणतया जनरल एनेस्थीसिया देकर (मरीज़ के पूरी तरह से बेहोश होने पर और वेंटीलेटर से जुड़े रहने पर) किया जाता है। जनरल एनेस्थीसिया की ज़रुरत ये दर्शाता है कि ये सर्जरी हॉस्पिटल या समान सर्जिकल सुविधा वाले जगह पर होना चाहिए। साधारणतया 1 से 4 इंच का कई चीरा लगाकर एक ही समय में सतही पात्र हटाए जाते हैं। स्वास्थ्य लाभ का समय अलग अलग होता है लेकिन आम तौर पर दो से चार हफ्ते लगते हैं।

वैरिकोज वेंस की सर्जरी के दो प्रमुख तरीके हैं

1. मिनी-फ्लेबेक्टॉमी
2. एम्बुलेटरी सर्जरी
मिनी-फ्लेबेक्टॉमी ऑफिस के अंदर की प्रक्रिया है जिसमें जनरल एनेस्थीसिया देकर नस के दोषपूर्ण क्षेत्र को बारीक सुइयों से निकाला जाता है। एम्बुलेटरी सर्जरी अस्पताल में होती है, जिसमें पेट और जांघ के बीच के भाग और एड़ियों या घुटने पर छोटे-छोटे चीरे लगाकर लम्बी सतही नस को निकालने के लिए की जाती है।

सर्जरी के दुष्प्रभाव

सर्जरी स्थायी दाग छोड़ सकता है।
गंभीर दुष्परिणाम असामान्य हैं
लेकिन जनरल एनेस्थीसिया से हमेशा हृदय या श्वसन सम्बन्धी जटिलताओं का जोखिम रहता है।
रक्त के बहने और जमने की समस्या हो सकती है, लेकिन जमा हुआ रक्त अपने आप ही बैठ जाता है और आगे किसी उपचार की आवश्यकता नहीं होती है।
घावों का संक्रमण, जलन, सूजन और लालिमा हो सकती है।
नस के चारों तरफ तंत्रिका फाइबर की क्षति एक बहुत सामान्य जटिल स्थिति है जो दर्द को जन्म दे सकती है।

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