लेज़र उपचार

लेज़र (LASER) का पूरा नाम है - लाइट एम्पलीफिकेशन बाय स्टिम्युलेटेड एमिशन ऑफ़ रेडिएशन। इस तकनीक में ऊष्मा ऊर्जा के प्रयोग से वैरिकोज वेंस को बंद किया जाता है। इस ऊष्मा ऊर्जा को विशेष मशीन द्वारा पैदा किया जाता है और विशेष डायोड लेज़र तंत्रिकाओं द्वारा रक्त वाहिनियों में भेजा जाता है।

वैरिकोज वेंस के लिए ये एंडोवेनस लेज़र उपचार विधि शल्य कटौती और दागों से बचाता है और ये लोकल एनेस्थीसिया देकर किया जाता है। ज़्यादातर वैरिकोज वेंस के मामलों को इस तकनीक से ठीक किया जा सकता है।

The Laser fiber into the veins

The Bioletic Laser Machine

जब लेज़र ऊर्जा को नस में डाला जाता है तो रक्त में स्थित पानी की मात्रा ख़ास तौर पर ऊष्मा ऊर्जा को सोख लेती है और नस की भीतरी परत (इंटिमा) को क्षति पहुंचाती है जो नस को टूटने और बंद करने के लिए मजबूर कर देता है। बाद में फाइब्रोसिस की प्रक्रिया के कारण नस हमेशा के लिए बंद हो जाता है और बचे हुए ऊतक शरीर के सामान्य गतिविधियों द्वारा बाहर निकल जाते हैं ताकि कुछ समय के बाद कोई भी नस ना दिखे।

वैरिकोज वेंस के उपचार की लेज़र तकनीक:

1. वैरिकोज वेंस के मामले को पहले सोनोग्राफी जाँच द्वारा विश्लेषण किया जाता है जिसे डोप्पलर अल्ट्रासाउंड जाँच कहते हैं।

2. नसों की श्रृंखला को त्वचा पर चिन्हित किया जाता है।

3. सुइयों को नसों में डालने वाली जगह पर लोकल एनेस्थीसिया लगाया जाता है। एक सुई अल्ट्रासाउंड के दिशा निर्देश में नस में डाली जाती है और ये वैसी ही प्रक्रिया है जैसे रक्त जांच के लिए नस से रक्त निकाला जाता है।

4. सुई के माध्यम से एक मार्गदर्शक तार, नस में डाला जाता है और उसके ऊपर एक छोटा प्लास्टिक का ट्यूब होता है जिसे कैथिटर कहते हैं। इस खोखले कैथिटर में से एक पतला लेज़र फाइबर, नस में डाला जाता है; ये सारी प्रक्रिया सोनोग्राफी के दिशानिर्देश में की जाती है।

5. लेज़र फाइबर के सिरे पर स्थित, त्वचा में से होकर चमकने वाली लाल लाईट के माध्यम से, नस में लेज़र फाइबर के पोजीशन का पता चलता है।

6. अब, प्रचुर मात्रा में पतला संवेदनाहारी द्रव जिसे ट्यूमसेंट एनेस्थीसिया कहते हैं, उसे नसों की श्रृंखला में डाला जाता है। ये बहुत ही पतली सुइयों द्वारा और अल्ट्रासाउंड के दिशानिर्देश में किया जाता है। इस संवेदनाहारी द्रव को नस के चारों ओर डाला जाता है ताकि नस अंदर के लेज़र फाइबर के ऊपर टूट जाये। नस के चारों तरफ इस संवेदनाहारी द्रव की सतह, ऊष्मा ऊर्जा को नस के बाहर अगल-बगल की संरचना तक जाने से रोकती है।

7. लेज़र फाइबर, लेज़र मशीन से जुड़ा रहता है और लेज़र ऊर्जा, नस में पहुँचायी जाती है। यह नस को तत्काल बंद कर देता है जिसे अल्ट्रासाउंड छवि में देखा जा सकता है। लेज़र फाइबर को धीरे से पीछे खींच लिया जाता है ताकि पूरी लम्बाई में नस को बंद कर दिया जाए।

8. टूटे हुए नसों के रूप में अंतिम परिणाम तत्काल ही देखा जा सकता है।

9. प्रक्रिया के अंत में कैथिटर को नस से बाहर निकाला जाता है जो एक छोटे से छेद का निशान छोड़ जाता है। जो कुछ दिनों में भर जाता है।

10. प्रक्रिया के अंत में एक दबाव वाली पट्टी या मोज़े उपचार किये हुए पैर के ऊपर लगाया जाता है और मरीज़ को 15 से 20 मिनट चलने को कहा जाता है। ज़्यादातर मरीज़ अपनी रोज़मर्रा की गतिविधियों और चालन को अगले दिन से शुरू कर सकते हैं।

वैरिकोज वेंस के लिए रेडियोफ्रीक्वेंसी अबलेशन

वैरिकोज वेंस के उपचार के लिए आरएफए की प्रक्रिया का मूल सिद्धांत, लेज़र जैसा ही है। नसों को बंद करने के लिए थर्मल (ऊष्मा ऊर्जा) का इस्तेमाल। इस तकनीक में रेडियोफ्रीक्वेंसी तरंगों द्वारा गर्मी पैदा की जाती है और इस ऊर्जा को नसों में एक विशेष आरएफए कैथिटर द्वारा पहुंचाया जाता है। इस उपचार की तकनीक, लेज़र उपचार जैसा ही है।

दुष्परिणाम

लेज़र अबलेशन को अच्छी तरह बर्दाश्त हो जाता है और इसके बहुत कम दुष्परिणाम हैं। जिन मरीज़ों का उपचार इस प्रक्रिया से होता है वे बड़ी तादाद में अपनी सामान्य गतिविधियां तत्काल सर्जरी के बाद शुरू कर पाते हैं। संकुचित नसों की वजह से कुछ मरीज़ों को हल्का सा दर्द होता है, जिसके लिए उस स्थान पर शीतलता या सूजन विरोधी मरहम लगाने से तुरंत और भरोसेमंद आराम मिलता है। वहां बहुत कम रक्तगुल्म गठन होता है।
लेज़र, छोटे टेलीएंजिक्टेसिया और मकड़ी नसों के उपचार के साथ-साथ वेरिसेस के उपचार के लिए भी लाभदायक होता है, जो लम्बे और छोटे सफेनोस वेंस की अक्षमता एवं पार्श्व और जालीदार नसों के कार्य की वजह से होता है। 
पारम्परिक नस चिकित्सा की तुलना में लेज़र अबलेशन तकनीक, जिसे ‘‘स्ट्रिपिंग’’ कहते हैं, उसमें कुल मिलाकर ज्यादा लाभ है: यह न्यूनतम रफ़्तार से फैलने वाला और इसलिए कम दर्दनाक प्रक्रिया है जो श्रेष्ठ कॉस्मेटिक प्रभाव और उत्कृष्ट एवं अत्यंत आशाजनक परिणाम देती है: मरीज़ उपचार के लिए चल के आता है और एक घंटे के अंदर अपनी वेरिसेस की समस्या का समाधान पाकर चल के जाता है!

सर्जरी के साथ लेज़र प्रक्रिया की तुलना

लेज़र सर्जरी
1. ओपीडी प्रक्रिया 1. हॉस्पिटल प्रक्रिया
2. लोकल एनेस्थीसिया 2. जनरल एनेस्थीसिया
3. एक घंटे की प्रक्रिया 3. तीन - चार घंटे की प्रक्रिया
4. कोई आराम नहीं 4. एक हफ्ते का आराम
5. अपना काम उसी दिन शुरू करें 5. अपना काम दो या तीन हफ्ते में शुरू करें
6. दीर्घकालिक पुनरावृत्ति 2-4% है 6. दीर्घकालिक पुनरावृत्ति 20-40% है
7. सस्ता 7. महँगा

ग्रेट सफेनोस वेंस का वैरिकोज वेंस लेज़र उपचार के मामलों का अध्ययन 

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