शिराएं कैसे काम करती हैं

संचार प्रणाली

कोशिकाओं में ऑक्सीजन पहुँचाने की ज़िम्मेदारी, संचार प्रणाली की होती है। यह हृदय, धमनियों, नसों, केशिकाओं और रक्त से बनी होती है। हृदय का पंप चलाने जैसा कार्य, ऑक्सीजन वाले खून को हृदय और फेंफड़ों से धमनियों और केशिकाओं द्वारा लाखों सारे शरीर में मौजूद कोशिकाएं तक पहुंचाती है। जब खून कोशिकाओं को जिंदा रखने के लिए ऑक्सीजन और खाना पहुंचाते हुए ऊतकों से होकर गुज़रता है तब वह शिराओं में जमा हो जाता है। 
खून तब शिराओं द्वारा हृदय में वापस चला जाता है। 
हृदय, धमनियों के माध्यम से खून को अधिक दबाव पर पंप करता है और इसलिए वह पैरों और ऊतकों में तेज़ी से पहुँचता है। 
मगर पैरों से खून का वापस आना इतना आसान नहीं होता है। पैर में हृदय नहीं होता इसलिए खून को वापस हृदय में लाने के लिए शरीर को दूसरा रास्ता अपनाना पड़ता है।

संचार प्रणाली

खड़े होना

जब आप खड़े होते हैं तो आपका हृदय पैरों से ऊपर रहता है। रक्त के स्तम्भ के भार की वजह से हृदय से पैरों तक खून का दबाव बढ़ जाता है। इसे “गुरुत्वाकर्षण” या “हाइड्रोस्टैटिक” दबाव कहते हैं। 
खड़े रहने से पड़ने वाला यह अतिरिक्त दबाव, धमनियों में खून को हृदय से पैरों तक पहुँचने में मदद करता है। लेकिन इस गुरुत्वाकर्षण या हाइड्रोस्टैटिक दबाव का मतलब है कि नसों में खून का दबाव इतना काफी नहीं है कि वह हृदय में वापस पहुँच सके।
यही कारण है कि जिन लोगों को सीधा खड़े रहना पड़ता है (जैसे सैनिक परेड में) वे बेहोश हो जाते हैं। वे खून को पैरों से वापस नहीं ले पाते और इसलिए दिमाग तक उसे पंप नहीं कर पाते और इसलिए वे बेहोश हो जाते हैं।
तो, इसको रोकने के लिए खून को पैरों से वापस पंप करने की और हृदय तक पहुँचाने की ज़रुरत है। 

खड़े होना

लेग पंप या मसल पंप या ‘‘पेरिफेरल हार्ट’’ का कार्य

जब हम बैठे या खड़े रहते हैं तो हम बेहोश इसलिए नहीं होते क्योंकि रक्त वापस हृदय तक पहुँच जाता है। गुरुत्वाकर्षण का दबाव पैरों के रक्त को नीचे की तरफ धकेलता है, जिससे एक ऐसे पंप की ज़रुरत है जो रक्त को वापस एड़ियों और पैर के निचले हिस्से से पेड़ू की तरफ धकेले, जहाँ से वह सांसों के द्वारा हृदय तक पहुँच जाये। परिधीय हृदय एक प्रणाली है जिसमें मांसपेशियों, नसों और पिंडलियों एवं पैरों के वाल्व साथ मिलकर ऑक्सीजन रहित रक्त को हृदय और फेंफड़ों में वापस धकेलता है। नसें एक तरफ़ा वाल्व से सज्जित हैं जो रक्त के पंजों से हृदय तक की वापसी में प्रतिवाह को रोकता है। ये वाल्व, जाल वाले दरवाज़े की तरह काम करते हैं जो हर मांसपेशी के सिकुड़ने से खुलता है और मांसपेशियों के शिथिल होने पर बंद होता है ताकि रक्त का प्रतिवाह रोका जा सके। 
लेग पंप, रक्त को पैरों से वापस पेडू में पंप करते वक़्त दो बातों पर निर्भर करता है:

लेग पंप का कार्य

गति

पैर की मांसपेशियों में संचार नसों को धकेल कर उन्हें दबाता है। इन सबमें सबसे महत्वपूर्ण संचार है, पिंडलियों का संचार जो एड़ियों के जोड़ को हिलाता है। 
दाहिनी ओर का चित्र पिंडलियों की मांसपेशियों को एड़ियों के जोड़ को हिलाते हुए दिखा रहा है - देखें वह कैसे अपने भीतर की नसों को दबाता है जब मांसपेशियां सिकुड़ती हैं

गति

वाल्व - नसों में स्थित

मांसपेशियों के द्वारा नसों को दबाने से रक्त का संचार होता है। लेकिन वाल्व के बिना रक्त दिशाहीन होता है और इसलिए रक्त पैरों से पंप नहीं होता। वाल्वों द्वारा इस प्रवाह की रोकथाम ही साधारण मनुष्यों में पैरों को बचाने की कुंजी है। जब वाल्व काम करते हैं तो नसों को सक्षम कहा जाता है। जब वाल्व ख़राब या कमज़ोर हो जाते हैं तो वे ठीक तरह काम नहीं करते हैं। जिसकी वजह से दूसरा हृदय व्याकुल हो जाता है और रक्त नसों में ही जमा रह जाता है।

दाहिनी तरफ के चित्र से पता चलता है कि अगर नसों में वाल्व नहीं होगा तो मांसपेशियों के सिकुड़ने से आम तौर पर क्या होगा। 
पैरों में नसों के काम करने की दो प्रणालियाँ हैं: गहरी प्रणाली और सतही प्रणाली। गहरी प्रणाली में बड़ी नसें होती हैं जिनका व्यास लगभग एक इंच होता है और वे हड्डियों के पास होती हैं, मांसपेशियों से घिरी हुई। सतही प्रणाली में वे नसें शामिल हैं जो त्वचा के ठीक नीचे होती हैं। ये प्रणालियाँ, नसों की श्रृंखला से दो जगहों पर मिलती हैं जिसको परफोरेटर कहते हैं। नसों वाला रक्त, पैरों से हृदय में वापस जाता है - 90% गहरे प्रणाली द्वारा और 10% सतही प्रणाली द्वारा।

वाल्व - नसों में स्थित

सतही प्रणाली में दो मुख्य प्रणालियाँ होती है

ग्रेट सफेनोस वेन: ये एड़ियों के आंतरिक हिस्से से शुरू होता है और पेट और जांघ के बीच के भाग की तरफ जाता है जहाँ वह गहरी नसों से मिलता है। इस जगह पर वेनस वाल्व का एकतरफ़ा रास्ता होता है जिसे सफेनो फेमोरल वाल्व कहते हैं। अगर यह वाल्व रिसना शुरू करता है तो रक्त, ग्रेट सफेनोस वेन में जमा हो जाता है और लम्बाई में फैलाव का कारण बनता है।

शॉर्ट सफेनो सिस्टम: पैर का यह सतही नस, एड़ियों के बाहरी हिस्से से शुरू होता है और ऊपर घुटनों के पीछे तक जाता है जहाँ वह गहरी नसों में प्रवेश करता है। इस जगह पर एक वेनस वाल्व होता है जिसे सफेनो पोपलिटियल नस कहते हैं। इस वाल्व के रिसाव से छोटा सफेनो नस में फैलाव आता है।

परफोरेटर वेन वाल्व 

विभिन्न स्तरों पर पैरों में सतही नस और गहरी नस को मिलाने वाली कई नसें होती हैं। इन्हें परफोरेटर नस कहते हैं और इनमें एक परफोरेटर वाल्व होता है जो सतही प्रणाली से गहरी प्रणाली में रक्त के बहाव को सक्षम बनाता है। अगर इस वाल्व में रिसाव होता है तो रक्त सीधा गहरी से सतही नसों की तरफ जाता है। ये साधारणतया रंजकता के लिए ज़िम्मेदार होता है जो प्रायः वैरिकोज वेंस के मरीज़ों के एड़ियों के आसपास देखा जाता है। ये नसें त्वचा की सीध में होतीं हैं, कुछ नसें फैली हुई भी नज़र आती हैं।

परफोरेटर वेन वाल्व

लेग पंप - असामान्य नसों की वजह से असफल

जब नस के वाल्व काम नहीं करते हैं तो उन्हें “अक्षम” कहा जाता है। जैसा सामान्य शिराओं में होता है, मांसपेशियां नस को संकुचित करके रक्त को नस के ऊपर और बाहर जाने के लिए मजबूर करती हैं। लेकिन जब दबाव कम होता है और नसें खुलती हैं तो रक्त पैरों में नीचे की तरफ चला जाता है क्योंकि वाल्व उन्हें रोक नहीं पाता है। इसे शिरा सम्बन्धी "प्रतिवाह" कहते हैं। वास्तव में कोई भी बीमारी जो नसों से संबंधित है जैसे कि वैरिकोज वेंस, पैरों में दर्द, नसों में एग्ज़ीमा, लिपोडर्मेटोस्क्लेरोसिस और पैर के नस का अल्सर, ये सारी समस्याएँ, लेग पंप के असफल होने और बाद में नसों के प्रतिवाह के कारण होती हैं।

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